Landing Page स्प्लिट टेस्टिंग बनाम A/B टेस्टिंग: मुख्य अंतर
आपने अपने ऐड कैंपेन को निखारने में अनगिनत घंटे लगाए हैं। आपकी टारगेटिंग सटीक है, ऐड कॉपी असरदार है, और आप अपने landing pages पर ट्रैफ़िक की एक स्थिर धारा ला रहे हैं।
आपने अपने ऐड कैंपेन को निखारने में अनगिनत घंटे लगाए हैं। आपकी टारगेटिंग सटीक है, ऐड कॉपी असरदार है, और आप अपने landing pages पर ट्रैफ़िक की एक स्थिर धारा ला रहे हैं।
लेकिन जब आप अपना एनालिटिक्स खोलते हैं, तो आँकड़े एक निराश करने वाली कहानी सुनाते हैं: आपका कन्वर्ज़न रेट उम्मीद से नीचे है, और कॉस्ट पर एक्विज़िशन (CPA) लगातार चढ़ता जा रहा है।
सुना-सुना लग रहा है?
कई एफ़िलिएट मार्केटर्स और lead gen बिज़नेस के लिए यह स्थिति बहुत आम है। आप असल में अपना मार्केटिंग बजट उड़ता देख रहे होते हैं, जबकि आपके landing pages अपनी क्षमता से कहीं कम प्रदर्शन कर रहे होते हैं। बाउंस होने वाला हर विज़िटर सिर्फ़ एक गँवाया हुआ मौका नहीं है, बल्कि मेज़ पर छूट गया असली पैसा है।
हम landing page स्प्लिट टेस्टिंग और A/B टेस्टिंग के बीच के मुख्य अंतर समझाएँगे, दिखाएँगे कि हर तरीका कैसे काम करता है, और यह तय करने में आपकी मदद करेंगे कि कन्वर्ज़न को ऑप्टिमाइज़ करने के लिए कौन-सा तरीका सबसे अच्छा रहेगा।
समाधान: Landing Page टेस्टिंग
Landing page टेस्टिंग का मतलब सिर्फ़ बटन के रंग या हेडलाइन को यूँ ही बदलते रहना नहीं है, हालाँकि वह भी इसका हिस्सा है।
Landing page टेस्टिंग एक सुनियोजित प्रक्रिया है, जिसमें पहले यूज़र के व्यवहार को समझा जाता है और फिर डेटा के आधार पर बदलाव किए जाते हैं। लक्ष्य है आपका कन्वर्ज़न रेट बढ़ाना और आपका मार्केटिंग ROI (या ऐड चला रहे हों तो ROAS) अधिकतम करना। अलग-अलग एलिमेंट को ऑप्टिमाइज़ और टेस्ट करना शुरू करने से पहले landing page की बनावट को समझ लेना बेहद ज़रूरी है।
इस विस्तृत गाइड में हम आपको ठीक-ठीक दिखाएँगे कि एक असरदार landing page टेस्टिंग रणनीति कैसे लागू की जाए। आप सीखेंगे:
- A/B टेस्टिंग और स्प्लिट टेस्टिंग में असली फ़र्क़ क्या है (इशारा: दोनों आपकी सोच से कहीं ज़्यादा मिलते-जुलते हैं)
- अपने landing pages पर टेस्ट करने के लिए ज़्यादा असर वाले एलिमेंट कैसे पहचानें
- सफल टेस्ट चलाने के लिए स्टेप-बाय-स्टेप निर्देश
- टेस्टिंग की आम ग़लतियाँ, जिनसे बचना चाहिए
- कन्वर्ज़न रेट ऑप्टिमाइज़ेशन में माहिर मार्केटिंग एक्सपर्ट्स की अपनाई एडवांस्ड रणनीतियाँ
लेकिन पहले landing page टेस्टिंग की पृष्ठभूमि से शुरुआत करते हैं।
Landing Page टेस्टिंग क्या है?
Landing page टेस्टिंग आपके वेब पेजों को बेहतर काम करने लायक बनाने में मदद करती है। यह एक सोचा-समझा तरीका है, जिसमें अलग-अलग तरह के पेज या पेज के अलग-अलग एलिमेंट आज़माकर देखा जाता है कि आपकी टारगेट ऑडियंस को सबसे ज़्यादा क्या पसंद आता है। अंदाज़ा लगाने के बजाय आप इस असली डेटा का इस्तेमाल करते हैं कि लोग आपके पेज पर कैसा व्यवहार करते हैं।
Landing pages टेस्ट करते समय आप अपने पेज के अलग-अलग वर्शन बनाते हैं और फिर ये वर्शन अपनी वेबसाइट के विज़िटर को दिखाते हैं।
नतीजे मापने से पता चलता है कि कौन-सा वर्शन आपके लक्ष्य तक बेहतर पहुँचाता है। ये लक्ष्य हो सकते हैं: ज़्यादा लोगों से फ़ॉर्म भरवाना, ख़रीदारी बढ़ाना, सब्सक्रिप्शन रेट सुधारना, और भी बहुत कुछ।
अगर आप इस घिसी-पिटी लीक में फँसे नहीं रहना चाहते, तो मार्केटिंग के तीन नियम अपनाना सबसे अच्छा है:
- टेस्ट करें
- टेस्ट करें, और
- टेस्ट करें!
आपको Landing Page स्प्लिट टेस्टिंग क्यों करनी चाहिए?
अपने pre-landers को टेस्ट करना कितना अहम है, यह जितना कहें कम है। शुरू करने में कुछ समय और संसाधन लगते हैं, लेकिन फ़ायदा आपके लगाए निवेश से कहीं ज़्यादा है।
अपने landing pages को टेस्ट करने के मुख्य फ़ायदे ये हैं:
1. बेहतर कन्वर्ज़न रेट पाएँ
Landing page टेस्टिंग का सबसे सीधा और मापने लायक फ़ायदा है कन्वर्ज़न रेट में सुधार।
असली मिसालें इस असर को साबित करती हैं: Hootsuite ने टेस्टिंग से कन्वर्ज़न में 16% की बढ़ोतरी हासिल की। CrazyEgg को लंबा कंटेंट इस्तेमाल करने से 363% ज़्यादा कन्वर्ज़न मिले।
2. रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) बढ़ाएँ
Landing page टेस्टिंग आपके मौजूदा ट्रैफ़िक की वैल्यू को अधिकतम करने में मदद करती है, जो पेड ऐडवर्टाइज़िंग कैंपेन चलाने वालों के लिए ख़ास तौर पर अहम है। ज़रा सोचिए:
- कन्वर्ज़न की कार्यक्षमता सुधारकर कॉस्ट पर एक्विज़िशन (CPA) घटाएँ
- अपने मौजूदा ऐड खर्च से ज़्यादा वैल्यू पाएँ
- मार्केटिंग बजट के बँटवारे पर डेटा के आधार पर फ़ैसले लें
- ट्रैफ़िक बढ़ाए बिना भी रेवेन्यू बढ़ाएँ
3. अपनी ऑडियंस को बेहतर जानें
टेस्टिंग दिखाती है कि आपके विज़िटर कैसे सोचते और कैसे बर्ताव करते हैं। अंदाज़े के बजाय आपको असली डेटा मिलता है कि आपकी ख़ास ऑडियंस के लिए क्या काम करता है। हीटमैप और session recordings जैसे टूल से आप ठीक-ठीक देख सकते हैं कि लोग आपके पेज का इस्तेमाल कैसे करते हैं।
4. यूज़र एक्सपीरियंस बेहतर बनाएँ
आज के विज़िटर उम्मीद करते हैं कि वेबसाइट सहजता से चले और तुरंत समझ आ जाए। टेस्टिंग उन समस्याओं को खोजने में मदद करती है जो लोगों को आपका पेज छोड़ने पर मजबूर कर सकती हैं। ये धीमी लोडिंग, उलझा हुआ नेविगेशन, या ज़रूरत से ज़्यादा सवाल पूछने वाले फ़ॉर्म हो सकते हैं।
5. डेटा के आधार पर फ़ैसले लें
टेस्टिंग की सबसे अच्छी बातों में से एक यह है कि यह आपकी मार्केटिंग से अंदाज़ेबाज़ी हटा देती है। राय या आम नियमों पर चलने के बजाय आप अपनी असली ऑडियंस के असली डेटा के आधार पर चुनाव कर सकते हैं। इससे अक्सर पता चलता है कि प्रचलित धारणाएँ हमेशा सही नहीं होतीं।
6. जोखिम घटाएँ
टेस्टिंग ऐसे बदलावों का जोखिम कम करने में मदद करती है जो प्रदर्शन को नुकसान पहुँचा सकते हैं:
- बदलावों को एक नियंत्रित माहौल में टेस्ट करें
- पूरी तरह लागू करने से पहले संभावित समस्याएँ पहचानें
- प्रयोग के दौरान अपने कन्वर्ज़न रेट को सुरक्षित रखें
- बड़े रीडिज़ाइन पर समझदारी से फ़ैसले लें
7. प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करें
अपने landing pages को लगातार बेहतर बनाते रहने की क्षमता आपको उन प्रतिस्पर्धियों से आगे रख सकती है जो अपने पेज टेस्ट नहीं करते। सावधानी से की गई टेस्टिंग के ज़रिए आपको अपने बाज़ार की ऐसी बातें मिल सकती हैं जो आपके प्रतिस्पर्धियों से छूट जाती हैं।
लगातार ऑप्टिमाइज़ेशन की इस प्रक्रिया का मतलब यह भी है कि आप बदलते बाज़ार हालात और यूज़र की पसंद के हिसाब से तेज़ी से ख़ुद को ढाल सकते हैं।
8. मल्टी-चैनल मार्केटिंग को मज़बूत बनाएँ
Landing page टेस्टिंग से मिली सीख आपकी पूरी मार्केटिंग रणनीति को बेहतर बना सकती है:
- सीखी हुई बातों को अलग-अलग मार्केटिंग चैनलों पर लागू करें
- संदेश में एकरूपता बेहतर करें
- पूरी कस्टमर जर्नी को ऑप्टिमाइज़ करें
- ऐड और landing pages के बीच बेहतर तालमेल बनाएँ
9. कस्टमर लाइफ़टाइम वैल्यू बढ़ाएँ
बेहतर landing pages ज़्यादा गुणवत्ता वाले कन्वर्ज़न दिला सकते हैं:
- ज़्यादा क्वालिफ़ाइड leads आकर्षित करें
- पहले संपर्क से ही कस्टमर संतुष्टि बेहतर करें
- बेहतर यूज़र एक्सपीरियंस से मज़बूत रिश्ते बनाएँ
- बेहतर मैसेजिंग से कस्टमर रिटेंशन बढ़ाएँ
10. बिज़नेस ग्रोथ में सहारा दें
Landing page टेस्टिंग बिज़नेस की टिकाऊ ग्रोथ में योगदान देती है:
- मार्केटिंग प्रयासों को ज़्यादा कुशलता से बढ़ाएँ
- समय के साथ मार्केटिंग ROI बेहतर करें
- ज़्यादा सोच-समझकर बिज़नेस फ़ैसले लें
- लगातार सुधार की नींव तैयार करें
Landing Page टेस्टिंग के प्रकार
अब जब आपको यक़ीन हो गया है कि landing page टेस्टिंग ज़रूरी है, तो अगला कदम यह सीखना है कि इसे कैसे किया जाए। landing pages टेस्ट करने के एक से ज़्यादा तरीके हैं, लेकिन आइए दो मुख्य तरीके देखें: रास्तों की संख्या के आधार पर और टेस्टिंग के तरीके के आधार पर।
रास्तों की संख्या के आधार पर
A/B टेस्टिंग बनाम स्प्लिट टेस्टिंग
मार्केटिंग की बातचीत में आप इन दोनों शब्दों को अक्सर एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल होते सुनेंगे, और इसकी ठोस वजह भी है: A/B टेस्टिंग और स्प्लिट टेस्टिंग असल में एक ही चीज़ हैं!
असली फ़र्क़ सिर्फ़ ज़ोर देने के तरीके में है:
- A/B टेस्टिंग में ज़ोर टेस्ट हो रहे दो वर्शन पर रहता है (वर्शन A बनाम वर्शन B, इसीलिए A/B)

- स्प्लिट टेस्टिंग में ज़ोर इस पर रहता है कि ट्रैफ़िक इन वर्शन के बीच कैसे बाँटा (स्प्लिट किया) जाता है

दोनों ही सूरतों में आप अपने landing page के अलग-अलग वर्शन बनाते हैं और अपना ट्रैफ़िक उनके बीच बाँटते हैं, ताकि देख सकें कि कौन-सा बेहतर प्रदर्शन करता है। इसमें सिर्फ़ दो वर्शन या दो ट्रैफ़िक पाथ शामिल होते हैं।
यह सबसे आम और सीधा टेस्टिंग तरीका है, जो शुरुआती और अनुभवी मार्केटर, दोनों के लिए एकदम सही है।
मल्टीवेरिएट टेस्टिंग
मल्टीवेरिएट टेस्टिंग (MV टेस्टिंग) टेस्टिंग को एक कदम आगे ले जाती है, क्योंकि इसमें आप दो से ज़्यादा landing pages टेस्ट कर सकते हैं, या ट्रैफ़िक को तीन, चार या उससे ज़्यादा रास्तों में बाँट सकते हैं। जैसा नाम से ही ज़ाहिर है, टेस्ट में कई वेरिएशन होते हैं (कई वेरिएशन = मल्टीवेरिएट)।
यह टेस्टिंग स्टाइल भी आम तौर पर इस्तेमाल होता है, हालाँकि कई लोग ग़लती से इसे भी A/B टेस्टिंग या स्प्लिट टेस्टिंग कह देते हैं।

मल्टीवेरिएट टेस्टिंग ज़्यादा व्यापक जानकारी दे सकती है, लेकिन स्टैटिस्टिकली सिग्निफ़िकेंट नतीजे पाने के लिए इसमें ज़्यादा ट्रैफ़िक चाहिए। जहाँ एक A/B टेस्ट के निष्कर्ष तक पहुँचने के लिए कुछ हज़ार विज़िटर काफ़ी हो सकते हैं, वहाँ मल्टीवेरिएट टेस्ट को दसियों हज़ार विज़िटर की ज़रूरत पड़ सकती है।
टेस्टिंग के तरीके के आधार पर
टेस्टिंग का तरीका टेस्टिंग रणनीति पर केंद्रित होता है।
1. Landing Page के प्रकार टेस्ट करना
पिछले लेख में हमने एफ़िलिएट landing pages के अलग-अलग प्रकारों की चर्चा की थी, इसलिए संभावना है कि अब आप समझ गए होंगे कि pre-landers एक-दूसरे से कितने अलग हो सकते हैं।
इस तरीके में आप बिल्कुल अलग-अलग landing pages टेस्ट करते हैं और देखते हैं कि कौन-सा सबसे अच्छा प्रदर्शन करता है।
इसे आसानी से समझने के लिए एक मिसाल लेते हैं।
मान लीजिए कि जो चीज़ प्रमोट की जा रही है वह एक स्मार्टवॉच है, जिसमें कन्वर्ज़न तब गिना जाता है जब विज़िटर वह आइटम ख़रीदता है।
यहाँ दो landing pages बनाए जा सकते हैं:
- Landing Page A: प्रोडक्ट फ़ीचर्स वाला landing page, जो प्रोडक्ट की ख़ूबियाँ और फ़ायदे दिखाता है, और “अभी एक्सप्लोर करें” व “अभी ख़रीदें” CTA बटन के साथ विज़िटर को प्रोडक्ट या ऑफ़र पेज पर भेजता है।

- Landing Page B: Advertorial landing page, जो स्टोरीटेलिंग और प्रोडक्ट टेस्टिमोनियल पर केंद्रित होकर विज़िटर की दिलचस्पी खींचता है। कॉल टू एक्शन हैं “सीमित समय के लिए 50% छूट पाएँ” और “उपलब्धता जाँचें”, जो अर्जेंसी का एहसास पैदा करते हैं। ये बटन भी विज़िटर को प्रोडक्ट पेज पर ही भेजते हैं।

ये सिर्फ़ अलग एलिमेंट वाले पेज नहीं हैं, बल्कि विज़िटर को कन्वर्ट करने के पूरी तरह अलग नज़रिये हैं। इस टेस्ट का विजेता बताता है कि कौन-सा नज़रिया या landing page का प्रकार आपकी ऑडियंस को सबसे ज़्यादा जँचता है।
2. Landing Page एलिमेंट टेस्ट करना
इस तरीके में आप एक ही landing page के भीतर कुछ ख़ास एलिमेंट को ऑप्टिमाइज़ करने पर ध्यान देते हैं।
टेस्ट किए जाने वाले आम एलिमेंट में ये शामिल हैं:
- बाकी सब कुछ एक जैसा रखते हुए हेडलाइन
- कॉल-टू-एक्शन बटन के रंग
- फ़ॉर्म की लंबाई और फ़ील्ड
- हीरो इमेज और विज़ुअल एलिमेंट
- पेज लेआउट और कंटेंट की व्यवस्था
ऊपर के उदाहरण को आगे बढ़ाते हुए मान लीजिए कि Advertorial landing page इस्तेमाल हो रहा है। एक ही प्रकार के दो वर्शन को सिर्फ़ हेडिंग बदलकर इस तरह टेस्ट किया जाएगा:
- स्प्लिट टेस्ट Landing Page A का टाइटल: लोग यह स्टाइलिश नई स्मार्टवॉच पाने के लिए क्यों टूट पड़ रहे हैं? सेहत के फ़ायदे अविश्वसनीय हैं

- स्प्लिट टेस्ट Landing Page B का टाइटल: स्टोर में सब बिक गया! न्यूयॉर्क के लोग यह कमाल की स्मार्टवॉच ख़रीदने ऑनलाइन दौड़ रहे हैं

यह रणनीति आपको यह पता लगाने देती है कि आपके पेज के कौन-से हिस्से कन्वर्ज़न में मदद करते हैं और कौन-से नुकसान पहुँचाते हैं। आप यह भी देख सकते हैं कि आपके पेज के अंतर पर यूज़र कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।
पेड ऐड इस्तेमाल करते समय Landing Page स्प्लिट टेस्ट की आदर्श प्रक्रिया
पेड ऐड चलाने पर landing page टेस्टिंग के लिए ज़्यादा व्यवस्थित तरीका चाहिए, क्योंकि हर विज़िटर के साथ एक लागत जुड़ी होती है। असरदार landing page टेस्टिंग के ज़रिए अपने ऐड खर्च पर रिटर्न अधिकतम करने की एक पूरी प्रक्रिया यहाँ दी गई है।
इसे समझना आसान बनाने के लिए हमने इसे तीन चरणों में बाँटा है।
चरण 1: Landing Page के प्रकार टेस्ट करना
पहला चरण यह पता लगाने का है कि आपके पेड ऐड से आने वाले विज़िटर के लिए किस तरह का landing page सबसे अच्छा चलता है।
Landing pages को कई अलग-अलग तरीकों से डिज़ाइन किया जा सकता है, और ये डिज़ाइन आपके विज़िटर से अलग-अलग नतीजे दिला सकते हैं।
टेस्ट करने लायक आम Landing Page प्रकार
- डायरेक्ट रिस्पॉन्स पेज – इन्हें सरल क्लिक-थ्रू पेज भी कहा जाता है। इन्हें तुरंत एक्शन करवाने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। इनमें आम तौर पर दमदार हेडलाइन, असरदार फ़ायदे और फ़ोल्ड के ऊपर साफ़ कॉल-टू-एक्शन होता है। फ़ोकस इस पर रहता है कि विज़िटर ढेर सारा कंटेंट स्क्रॉल किए बिना जल्दी कन्वर्ट हो जाएँ।
- लंबे सेल्स पेज – ये पेज एक पूरी कहानी सुनाते हैं और उन प्रोडक्ट या सेवाओं के लिए अच्छे रहते हैं जिन्हें ज़्यादा समझाना पड़ता है या जिनकी कीमत ज़्यादा होती है। इनमें विस्तृत फ़ायदे, टेस्टिमोनियल, FAQ और पूरे पेज में कई कॉल-टू-एक्शन होते हैं।
- वीडियो-केंद्रित landing pages – ये पेज विज़िटर को जोड़े रखने के लिए वीडियो को मुख्य कंटेंट माध्यम की तरह इस्तेमाल करते हैं। वीडियो प्रोडक्ट समझा सकता है, टेस्टिमोनियल दिखा सकता है, या यह दिखा सकता है कि कोई चीज़ कैसे काम करती है। ये ख़ासकर उन जटिल प्रोडक्ट या सेवाओं के लिए असरदार हैं जिन्हें विज़ुअल तरीके से समझाने से फ़ायदा होता है।
- मल्टी-स्टेप landing pages – सारी जानकारी एक साथ दिखाने के बजाय ये पेज विज़िटर को स्टेप की एक कड़ी से गुज़ारते हैं। leads को क्वालिफ़ाई करने या विज़िटर पर बोझ डाले बिना ब्योरेवार जानकारी इकट्ठा करने के लिए ये ख़ास तौर पर असरदार हो सकते हैं।
बेशक, ये सिर्फ़ सुझाए गए प्रकार हैं। आप अपने लक्ष्यों के आधार पर दूसरे तरह के landing pages भी हमेशा टेस्ट कर सकते हैं।
अगर आप एफ़िलिएट मार्केटर हैं, तो ज़्यादा जानकारी के लिए हम आपको अपनी गाइड परफ़ेक्ट एफ़िलिएट मार्केटिंग Landing Page कैसे बनाएँ पढ़ने की सलाह देते हैं।
टेस्टिंग प्रक्रिया
- 3-4 अलग-अलग प्रकार के landing pages बनाएँ
- अपने ऐड ट्रैफ़िक को उनके बीच बराबर बाँटें
- टेस्ट को कम से कम 2 हफ़्ते चलाएँ
-
इन ज़रूरी मेट्रिक्स को ट्रैक करें:
- कन्वर्ज़न रेट (CR)
- कॉस्ट पर एक्विज़िशन (CPA) या प्रति कन्वर्ज़न लागत
- क्लिक-थ्रू रेट (CTR)
- पेज पर औसत समय
- बाउंस रेट
- अपने प्राथमिक KPI के आधार पर विजेता पेज प्रकार पहचानें
- ख़राब प्रदर्शन करने वाले landing pages को रोक दें
अगर ऑप्टिमाइज़ेशन को लेकर आपके कोई सवाल हैं, तो नीचे हमारा FAQ सेक्शन देखें। हो सकता है जो बात आपको परेशान कर रही है, उसका जवाब हमारे पास हो।
चरण 2: पेज एलिमेंट टेस्टिंग
जब आप अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला landing page प्रकार पहचान लें, तो उस पेज के भीतर ख़ास एलिमेंट की स्प्लिट टेस्टिंग की ओर बढ़ें। आप कौन-से एलिमेंट टेस्ट कर सकते हैं, इस पर हम आगे बात करेंगे।
यह चरण आपके चुने हुए फ़ॉर्मेट को निखारने और ऑप्टिमाइज़ करने का है, इसलिए आप असल में विजेता पेज के अलग-अलग वर्शन बनाएँगे और ट्रैफ़िक वहाँ भेजेंगे।
Landing Page स्प्लिट टेस्टिंग का रणनीतिक तरीका
बिल्ट-इन Landing Page स्प्लिट टेस्टिंग फ़ीचर वाले पेज बिल्डर
कुछ landing page बिल्डर अपने प्लेटफ़ॉर्म में ही टेस्टिंग की सुविधा के साथ आते हैं। यह बहुत बड़ा फ़ायदा हो सकता है, क्योंकि आपको अपने वर्कफ़्लो में अलग से थर्ड-पार्टी टेस्टिंग टूल जोड़ने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
ये प्लेटफ़ॉर्म आम तौर पर पेज बनाने, होस्टिंग और टेस्टिंग, तीनों पहलू संभालते हैं। इससे आपकी पूरी landing page ऑप्टिमाइज़ेशन प्रक्रिया को एक ही जगह मैनेज करना आसान हो जाता है।
इनमें से कई प्लेटफ़ॉर्म में ये भी शामिल होते हैं:
- landing page आसानी से बनाने के लिए विज़ुअल पेज बिल्डर
- बिल्ट-इन एनालिटिक्स डैशबोर्ड
- ऑटोमैटिक ट्रैफ़िक वितरण
- रियल-टाइम परफ़ॉर्मेंस मॉनिटरिंग
- वेरिएंट को आसानी से डुप्लिकेट और मैनेज करना
- स्टैटिस्टिकल सिग्निफ़िकेंस की गणना
अगर आप किसी landing page बिल्डर के साथ काम कर रहे हैं, तो हम सुझाव देते हैं कि देखें कि क्या वह LP टेस्टिंग की सुविधा देता है।
अपने Landing Pages पर क्या टेस्ट करें
Landing page टेस्टिंग की बात आती है तो आपके पास ढेरों विकल्प होते हैं। आपके पेज का हर एलिमेंट आपके कन्वर्ज़न रेट पर असर डाल सकता है। लेकिन शुरू कहाँ से करें?
आइए सबसे अहम हिस्सों को देखें जिन्हें आप टेस्ट कर सकते हैं, वे क्यों मायने रखते हैं, और उन्हें अच्छी तरह कैसे टेस्ट करें।
हेडलाइन
हेडलाइन वह चीज़ है जो विज़िटर आपके पेज पर आते ही सबसे पहले देखते हैं। और जैसा हम जानते हैं, पहली छाप बेहद अहम होती है। अपनी हेडलाइन को अपनी एलिवेटर पिच समझिए: किसी का ध्यान खींचने और उसे आगे पढ़ने के लिए उत्सुक करने के लिए आपके पास बस कुछ ही सेकंड होते हैं।

क्या टेस्ट करें:
- लंबाई (छोटी और दमदार बनाम लंबी और ज़्यादा विस्तृत)
- अलग-अलग वैल्यू प्रपोज़िशन
- सवाल बनाम कथन वाला फ़ॉर्मेट
- संख्याएँ या आँकड़े शामिल करना
- समस्या-केंद्रित बनाम समाधान-केंद्रित तरीके
- निजी बनाम पेशेवर लहजा
Landing Page कॉपी
जहाँ हेडलाइन ध्यान खींचती है, वहीं landing page कॉपी विज़िटर को एक्शन लेने के लिए मनाने का भारी काम करती है। यहीं आप:
- अपने ऑफ़र को विस्तार से समझाते हैं
- पेन पॉइंट्स पर बात करते हैं
- आपत्तियों का जवाब देते हैं
- यह दलील बनाते हैं कि किसी को कन्वर्ट क्यों करना चाहिए, यानी ख़रीदना या सब्सक्राइब करना चाहिए।

Landing Page कॉपी में क्या टेस्ट करें:
- छोटा बनाम लंबा कंटेंट
- लहजे के अलग-अलग अंदाज़ (पेशेवर, बातचीत वाला, तकनीकी)
- कंटेंट की संरचना (बुलेट पॉइंट बनाम पैराग्राफ़)
- जानकारी का क्रम
- तकनीकी बनाम सरल भाषा
- फ़ायदों पर अलग-अलग ज़ोर
- फ़ीचर के विवरण बनाम फ़ायदों के विवरण
- समस्या/समाधान की चर्चा
- कहानी-आधारित तरीके बनाम सीधा पिच
छोटा कंटेंट हमेशा काम नहीं करता और लंबा कंटेंट भी हमेशा नहीं करता, जैसा कि SignalvNoise के Highrise वेबसाइट पर किए गए टेस्ट से साबित हुआ है।
कॉल-टू-एक्शन (CTA) बटन
आपका CTA बटन वह जगह है जहाँ जादू होता है और जहाँ विज़िटर तय करते हैं कि छोड़कर जाना है या कन्वर्ट करना है। इसे सही कर लेने से आपके नतीजे नाटकीय रूप से सुधर सकते हैं।

CTA में क्या टेस्ट करें:
बटन टेक्स्ट
- एक्शन शब्द (“पाएँ”, “शुरू करें”, “जुड़ें” बनाम “डाउनलोड करें”, “ख़रीदें”, “साइन अप करें”)
- फ़ायदे पर केंद्रित बनाम एक्शन पर केंद्रित टेक्स्ट
- बटन टेक्स्ट की लंबाई
- निजी बनाम सामान्य भाषा (“मेरा फ़्री ट्रायल शुरू करें” बनाम “फ़्री ट्रायल शुरू करें”)
बटन डिज़ाइन
- रंग (अलग से उभरने वाले कंट्रास्ट रंग टेस्ट करें)
- साइज़ (ऐसा रखें कि नज़र आए, पर हावी न हो जाए)
- आकार (गोल कोने बनाम तीखे किनारे)
- आइकन या तीर जोड़ना
बटन की जगह
- फ़ोल्ड के ऊपर बनाम कंटेंट के नीचे
- बाएँ बनाम दाएँ अलाइनमेंट
- कई जगहों पर
- स्टिकी बटन जो स्क्रॉल के साथ चलते हैं
असली मिसाल:
HubSpot ने एक landing page का CTA बटन हरे से लाल करके कन्वर्ज़न में 21% की बढ़ोतरी देखी। लाल रंग हमेशा हरे से बेहतर नहीं होता, लेकिन यह दिखाता है कि रंग का एक सीधा-सा बदलाव भी कितना बड़ा फ़र्क़ ला सकता है।
इमेज और वीडियो
आपके landing page का मुख्य विज़ुअल एलिमेंट आपका कन्वर्ज़न रेट बना या बिगाड़ सकता है। चाहे आप हीरो इमेज इस्तेमाल करें, प्रोडक्ट फ़ोटो या वीडियो, उसे:
- आपके संदेश का साथ देना चाहिए
- विज़िटर की दिलचस्पी बनाए रखनी चाहिए
- आपकी ऑडियंस के लिए मायने रखना चाहिए

क्या टेस्ट करें
इमेज
- प्रोडक्ट फ़ोटो बनाम लाइफ़स्टाइल इमेज
- लोग बनाम प्रोडक्ट
- क्लोज़-अप बनाम वाइड शॉट
- अलग-अलग संदर्भ या इस्तेमाल के मामले
- लोगों के साथ बनाम बिना लोगों के
- पेशेवर बनाम असली-सी लगने वाली फ़ोटो
- स्टैटिक बनाम एनिमेटेड इमेज (GIF)
वीडियो
- वीडियो बनाम इमेज
- ऑटोप्ले बनाम क्लिक करके चलाना
- वीडियो की लंबाई
- अलग-अलग प्रकार (एक्सप्लेनर, टेस्टिमोनियल, प्रोडक्ट डेमो)
- थंबनेल इमेज के अलग-अलग वर्शन
Lead जनरेशन फ़ॉर्म
आपका फ़ॉर्म वह जगह है जहाँ विज़िटर leads बनते हैं, इसलिए उसे अच्छी तरह काम करना चाहिए। असली चुनौती संतुलन खोजने की है: इतनी जानकारी इकट्ठा करना जो काफ़ी हो, पर ज़्यादा फ़ील्ड से लोगों को डराना नहीं।

क्या टेस्ट करें
फ़ॉर्म की लंबाई
- फ़ील्ड की संख्या
- ज़रूरी बनाम वैकल्पिक फ़ील्ड
- प्रोग्रेसिव डिस्क्लोज़र (ज़रूरत के हिसाब से और फ़ील्ड दिखाना)
फ़ॉर्म डिज़ाइन
- सिंगल-कॉलम बनाम मल्टी-कॉलम लेआउट
- फ़ील्ड का क्रम
- लेबल की जगह (फ़ील्ड के ऊपर बनाम फ़ील्ड के अंदर)
- एरर मैसेज की स्टाइल और जगह
फ़ॉर्म फ़ील्ड
- फ़ील्ड के अलग-अलग प्रकार (ड्रॉपडाउन बनाम रेडियो बटन)
- फ़ील्ड लेबल और प्लेसहोल्डर टेक्स्ट
- स्मार्ट डिफ़ॉल्ट
- वैलिडेशन के तरीके
आप फ़ॉर्म फ़ील्ड को कई पेजों में भी बाँट सकते हैं, जिन तक यूज़र पिछले पेज का फ़ॉर्म भरते ही पहुँच जाते हैं।
असली मिसाल:
CXL के किए टेस्ट के मुताबिक़, TruckersReports के landing page पर फ़ॉर्म लंबा होने पर ऑप्ट-इन ज़्यादा मिले, बनिस्बत उस स्थिति के जब सिर्फ़ ईमेल फ़ील्ड ज़रूरी था। इससे पता चलता है कि छोटे फ़ॉर्म का मतलब हमेशा ज़्यादा leads नहीं होता। उलटे, इसका मतलब कम भरोसा भी हो सकता है।

इमेज स्रोत: CXL.com
सोशल प्रूफ़ और ट्रस्ट एलिमेंट
लोग भीड़ के पीछे चलते हैं, और इसीलिए landing pages पर सोशल प्रूफ़ इतना असरदार होता है। इसमें टेस्टिमोनियल, रिव्यू, क्लाइंट लोगो और ट्रस्ट बैज शामिल हैं।

सोशल प्रूफ़ को टेस्ट क्यों करें?
रिसर्च के मुताबिक़ 79% लोग कहते हैं कि रिव्यू जैसा यूज़र-जनरेटेड कंटेंट उनके ख़रीदारी के फ़ैसलों पर बहुत असर डालता है। लेकिन आप इस सोशल प्रूफ़ को कैसे पेश करते हैं, यह भी मायने रखता है।
क्या टेस्ट करें
टेस्टिमोनियल
- लंबाई (छोटे उद्धरण बनाम विस्तृत कहानियाँ)
- टेस्टिमोनियल की संख्या
- फ़ॉर्मेट (टेक्स्ट बनाम वीडियो)
- पेज पर जगह
- फ़ोटो के साथ बनाम बिना फ़ोटो के
- इंडस्ट्री-विशेष बनाम सामान्य फ़ीडबैक
ट्रस्ट बैज
- अलग-अलग सिक्योरिटी सील
- इंडस्ट्री सर्टिफ़िकेशन
- अवॉर्ड बैज
- पार्टनर लोगो
- जगह और साइज़
पेज लेआउट और डिज़ाइन
आप अपने landing page पर एलिमेंट को जिस तरह सजाते हैं, उसका इस पर बड़ा असर पड़ता है कि विज़िटर आपके कंटेंट से कैसे जुड़ते हैं और कन्वर्ट होते हैं या नहीं। इसे कमरे में फ़र्नीचर सजाने जैसा समझिए: आप चाहते हैं कि एक स्वाभाविक प्रवाह लोगों को वहाँ ले जाए जहाँ आप उन्हें ले जाना चाहते हैं।

क्या टेस्ट करें:
- सिंगल-कॉलम बनाम मल्टी-कॉलम डिज़ाइन
- साइडबार के साथ या बिना साइडबार
- कंटेंट का क्रम
- ख़ाली जगह और एलिमेंट के बीच की दूरी
- मोबाइल-रिस्पॉन्सिव लेआउट
- नेविगेशन के विकल्प (या मेन्यू को पूरी तरह हटा देना)
- फ़ुटर का कंटेंट और जगह
काउंटडाउन टाइमर और अर्जेंसी एलिमेंट
अर्जेंसी का एहसास जगाने से विज़िटर फ़ैसला टालने के बजाय एक्शन लेने को प्रेरित हो सकते हैं। फिर भी इन एलिमेंट को टेस्ट करना ज़रूरी है, क्योंकि ये कन्वर्ज़न बढ़ा भी सकते हैं और सस्ते हथकंडे जैसे भी लग सकते हैं।

क्या टेस्ट करें:
- टाइमर की जगह
- काउंटडाउन की अलग-अलग अवधि
- तय डेडलाइन बनाम डायनेमिक काउंटडाउन
- टाइमर का डिज़ाइन और स्टाइल
- अर्जेंसी पर केंद्रित कॉपी के वर्शन
- टाइमर के साथ बनाम बिना टाइमर के
वैल्यू प्रपोज़िशन और यूनीक सेलिंग प्रपोज़िशन (USP)
आपका वैल्यू प्रपोज़िशन विज़िटर को बताता है कि उन्हें प्रतिस्पर्धियों के बजाय आपको क्यों चुनना चाहिए। इसे अक्सर ख़ूब टेस्ट करना फ़ायदेमंद होता है, क्योंकि यह आपकी कन्वर्ज़न सफलता की बुनियाद है।

क्या टेस्ट करें:
- फ़ायदों पर अलग-अलग ज़ोर
- समस्या सुलझाने के अलग-अलग कोण
- प्रतिस्पर्धी बढ़त
- इंडस्ट्री-विशेष बनाम सामान्य वैल्यू प्रपोज़िशन
- फ़ीचर-केंद्रित बनाम फ़ायदा-केंद्रित मैसेजिंग
असली मिसाल:
Hootsuite ने अपने वैल्यू प्रपोज़िशन को निखारकर, ताकि वह अपने मुख्य फ़ायदों को ज़्यादा साफ़ ढंग से बता सके, कन्वर्ज़न में 16% की बढ़ोतरी हासिल की। यूज़र फ़ीडबैक से उन्हें पता चला कि फ़ैसला करने से पहले विज़िटर को यह जानने के लिए ज़्यादा ठोस जानकारी चाहिए थी कि यह टूल उनकी मदद कैसे करेगा।
कीमतें और ऑफ़र
आप अपनी कीमतें और ख़ास ऑफ़र कैसे पेश करते हैं, इसका कन्वर्ज़न रेट पर काफ़ी असर पड़ सकता है। कीमतें दिखाने के तरीके में छोटे बदलाव भी इस पर असर डाल सकते हैं कि विज़िटर वैल्यू को कैसे देखते हैं।

क्या टेस्ट करें:
- प्राइस एंकरिंग (मूल कीमत बनाम छूट वाली कीमत दिखाना)
- छूट के अलग-अलग ढाँचे
- कीमत का फ़ॉर्मेट ($99 बनाम $99.00 बनाम $99.99)
- मासिक बनाम सालाना प्राइसिंग पर ज़ोर
- बंडल ऑफ़र बनाम अलग-अलग कीमत
- कीमत की जानकारी की जगह
- जानकारी किस तरह पहुँचाई गई
इंटरैक्टिव एलिमेंट
इंटरैक्टिव एलिमेंट आपके landing page को ज़्यादा दिलचस्प बना सकते हैं और विज़िटर को आपका ऑफ़र बेहतर समझने में मदद कर सकते हैं।
हालाँकि, अगर इन्हें सावधानी से लागू न किया जाए तो ये आपके मुख्य कन्वर्ज़न लक्ष्य से ध्यान भी भटका सकते हैं।

क्या टेस्ट करें:
- कैलकुलेटर (ROI कैलकुलेटर, प्राइसिंग कैलकुलेटर, बचत अनुमान टूल)
- प्रोडक्ट कॉन्फ़िगरेटर
- इंटरैक्टिव डेमो
- घूमने वाले व्हील
- Quiz और असेसमेंट
- लाइव चैट बनाम चैटबॉट
- सर्वे फ़ॉर्म
- इंटरैक्टिव प्राइसिंग टेबल
- वीडियो प्लेयर (इंटरैक्टिव बनाम स्टैटिक)
- होवर इफ़ेक्ट और एनिमेशन
- इंटरैक्टिव इन्फ़ोग्राफ़िक
इंटरैक्टिव एलिमेंट टेस्ट करते समय उनकी मौजूदगी और उनका डिज़ाइन, दोनों पर विचार करें। कभी-कभी एक सरल कैलकुलेटर किसी जटिल कैलकुलेटर से बेहतर निकल सकता है, या एक बुनियादी quiz किसी विस्तृत असेसमेंट से ज़्यादा क्वालिफ़ाइड leads दे सकता है।
ऑडियंस टारगेटिंग और पर्सनलाइज़ेशन
कभी-कभी बात अलग-अलग एलिमेंट टेस्ट करने की नहीं होती, बल्कि यह टेस्ट करने की होती है कि आप अपना पेज अलग-अलग ऑडियंस सेगमेंट के सामने कैसे पेश करते हैं।
क्या टेस्ट करें:
- भौगोलिक रूप से ख़ास कंटेंट
- इंडस्ट्री-विशेष मैसेजिंग
- भूमिका पर आधारित वैल्यू प्रपोज़िशन
- अलग-अलग भाषाएँ या सांस्कृतिक संदर्भ
- अलग-अलग ट्रैफ़िक स्रोतों के लिए कस्टम कंटेंट
अगर आपने इसे अब तक आज़माया नहीं है, तो हम अपने landing page में डायनेमिक कीवर्ड इंसर्शन इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। यह विज़िटर के डेटा के आधार पर पेज पर दिखाई जाने वाली जानकारी अपने-आप बदल देता है।
उदाहरण के लिए, अगर आप वेबपेज पर अपने विज़िटर का मौजूदा शहर दिखाना चाहते हैं, तो आप डायनेमिक टोकन [[city]] इस्तेमाल कर सकते हैं, और वह पहले से भर जाएगा।
इसे कैसे किया जा सकता है, इसका एक वीडियो यहाँ है।
https://kb.landerlab.io/wp-content/uploads/2024/05/DynamicTokens.webm
डायनेमिक टोकन इस्तेमाल करने से आप एक ही landing page के कई वर्शन बनाए बिना और अपनी ऑडियंस को बेहद बारीकी से टारगेट किए बिना भी अपना कन्वर्ज़न रेट काफ़ी बढ़ा सकते हैं।
सिंगल-स्टेप बनाम मल्टी-स्टेप अनुभव
विज़िटर से कन्वर्ज़न तक का सफ़र हमेशा एक ही पेज पर तय होना ज़रूरी नहीं है। अलग-अलग पेज सीक्वेंस और मल्टी-स्टेप प्रक्रियाएँ टेस्ट करने से कभी-कभी सब कुछ एक ही स्टेप में निपटाने की कोशिश से बेहतर नतीजे मिल सकते हैं।
मल्टी-स्टेप अनुभव क्यों टेस्ट करें?
मल्टी-स्टेप अनुभव जटिल ऑफ़र को ज़्यादा संभालने लायक बना सकते हैं और leads को बेहतर क्वालिफ़ाई करने में मदद करते हैं। विज़िटर पर सब कुछ एक साथ थोपने के बजाय आप उन्हें कन्वर्ज़न की ज़्यादा स्वाभाविक प्रक्रिया से गुज़ार सकते हैं।

क्या टेस्ट करें:
- एक लंबा पेज बनाम कई छोटे पेज
- प्रोग्रेसिव फ़ॉर्म भरना (एक लंबे फ़ॉर्म को कई स्टेप में तोड़ना)
- अलग-अलग पेज सीक्वेंस और यूज़र फ़्लो
- थैंक-यू पेज के अलग-अलग वर्शन और अगले स्टेप
- मुख्य ऑफ़र से पहले क्वालिफ़िकेशन स्टेप
- जानकारी का क्रमिक खुलासा (यूज़र के आगे बढ़ने के साथ और ब्योरे दिखाना)
बेस्ट प्रैक्टिस सुझाव:
- प्रोग्रेस बार इस्तेमाल करें, ताकि विज़िटर को पता रहे कि वे प्रक्रिया में कहाँ हैं
- निजी जानकारी या क्रेडिट कार्ड जानकारी जैसी वित्तीय जानकारी (अगर ज़रूरी हो) माँगने से पहले आसान, कम डराने वाले सवालों से शुरुआत करें
- जानकारी और फ़ॉर्म फ़ील्ड के अलग-अलग क्रम टेस्ट करें
- यात्रा को पर्सनलाइज़ करने के लिए कंडीशनल लॉजिक इस्तेमाल करने पर विचार करें
- सुनिश्चित करें कि हर स्टेप स्वाभाविक रूप से अगले स्टेप में ले जाए
अपने Landing Page टेस्ट की सफलता कैसे मापें
अपनी landing page टेस्टिंग की सफलता का मूल्यांकन करते समय सही मेट्रिक्स पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। नियमित landing page मॉनिटरिंग यह सुनिश्चित करती है कि आप सोच-समझकर ऑप्टिमाइज़ेशन फ़ैसले लेने के लिए प्रमुख परफ़ॉर्मेंस इंडिकेटर ट्रैक कर रहे हैं।
यहाँ प्रमुख परफ़ॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI) और मेट्रिक्स की एक सूची है, जो यह आँकने में काम आती है कि आपके कौन-से landing pages अच्छे नतीजे दे रहे हैं।
ध्यान रखें कि आप सभी वर्शन का डेटा इकट्ठा करें, ताकि आप उनके प्रदर्शन का सही विश्लेषण और तुलना कर सकें।
प्राथमिक कन्वर्ज़न मेट्रिक्स
कन्वर्ज़न रेट
यह दिखाता है कि पेज पर आए कुल विज़िटर की तुलना में कितने विज़िटर ने कन्वर्ज़न माने जाने के लिए ज़रूरी एक्शन किया। अपने landing page का कन्वर्ज़न रेट जाँचने से सुधार की गुंजाइश वाली जगहें पहचानने में मदद मिलती है और यह पक्का होता है कि आपका ट्रैफ़िक सार्थक नतीजों में बदल रहा है।
कन्वर्ज़न रेट (CR) इस तरह निकाला जाता है:

यह मेट्रिक ख़ासकर lead जनरेशन landing pages के लिए अहम है, जिनका मुख्य लक्ष्य विज़िटर की जानकारी इकट्ठा करना होता है।
क्लिक-थ्रू रेट (CTR)
CTR उन विज़िटर का प्रतिशत मापता है जो आपके कॉल-टू-एक्शन बटन या लिंक पर क्लिक करते हैं। यह इस तरह निकाला जाता है:

ज़्यादा CTR आम तौर पर बताता है कि आपके landing page के एलिमेंट विज़िटर को आपके चाहे हुए एक्शन की ओर असरदार ढंग से ले जा रहे हैं।
बाउंस रेट
बाउंस रेट उन विज़िटर का प्रतिशत दिखाता है जो कोई भी एक्शन लिए बिना आपका landing page छोड़ देते हैं। ऊँचे बाउंस रेट का अक्सर मतलब होता है:
- आपका पेज विज़िटर की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा
- कंटेंट पर्याप्त दिलचस्प नहीं है
- ट्रैफ़िक के स्रोत और landing page के बीच तालमेल की कमी है
यूज़र एंगेजमेंट मेट्रिक्स
पेज पर बिताया समय
पेज पर औसत समय आपको यह समझने में मदद करता है कि आपका कंटेंट कितना दिलचस्प है। ज़्यादा समय आम तौर पर बताता है कि विज़िटर आपका कंटेंट वैसे ही पढ़ रहे हैं जैसी आपने उम्मीद की थी।
बहुत कम समय यह इशारा कर सकता है कि मैसेजिंग साफ़ नहीं है या पेज का लेआउट ख़राब है। इससे भी बुरा, हो सकता है कि कंटेंट विज़िटर के इरादे से मेल ही न खाता हो।
स्क्रॉल डेप्थ
यह मेट्रिक बताती है कि विज़िटर आपके landing page पर कितना नीचे तक स्क्रॉल करते हैं, यानी किन कंटेंट सेक्शन पर सबसे ज़्यादा ध्यान जाता है।
इस मेट्रिक से मिलने वाली मुख्य जानकारियों में ये शामिल हैं:
- क्या अहम एलिमेंट ज़्यादा नज़र आने वाली जगहों पर रखे गए हैं
- क्या आपके पेज की लंबाई सही है
- कौन-से सेक्शन विज़िटर की दिलचस्पी बनाए रखते हैं
इसकी निगरानी हीटमैप जैसे टूल की मदद से की जा सकती है।
इंटरैक्शन रेट
ट्रैक करें कि विज़िटर पेज के अलग-अलग एलिमेंट के साथ कैसे इंटरैक्ट करते हैं:
- फ़ॉर्म फ़ील्ड में एंगेजमेंट
- वीडियो प्ले रेट
- इंटरैक्टिव एलिमेंट पर क्लिक पैटर्न
- माउस मूवमेंट और होवर पैटर्न
स्क्रॉल डेप्थ की तरह, आप इसे Google Tag Manager और Hotjar (हीटमैप) जैसे थर्ड-पार्टी टूल से ट्रैक कर सकते हैं।
बिज़नेस इम्पैक्ट मेट्रिक्स
अक्सर कारोबारों को सबसे ज़्यादा दिलचस्पी इसी में होती है।
कॉस्ट पर एक्विज़िशन (CPA)
CPA वह रकम है जो आप एक कस्टमर को कन्वर्ट करवाने (कुछ ख़रीदवाने या मनचाहा एक्शन करवाने) पर ख़र्च करते हैं।

कम CPA बेहतर landing page प्रदर्शन और ज़्यादा ROI का संकेत है। अगर आप अपने landing page का इस्तेमाल leads इकट्ठा करने के लिए कर रहे हैं, तो इसे कॉस्ट पर Lead कहा जाएगा। शब्द अलग हैं, पर गणना वही है।
औसत ऑर्डर वैल्यू (AOV)
ईकॉमर्स landing pages के लिए आप ट्रैक कर सकते हैं कि अलग-अलग वर्शन ख़रीदारी की रकम पर कैसे असर डालते हैं:

इससे पता चलता है कि landing page के कौन-से एलिमेंट ज़्यादा वैल्यू वाले कन्वर्ज़न दिलाते हैं।
रिटर्न ऑन ऐड स्पेंड (ROAS)
ROAS विज्ञापन लागत की तुलना में पैदा हुआ रेवेन्यू मापता है:

यह मेट्रिक पेड ट्रैफ़िक कैंपेन के लिए landing pages को ऑप्टिमाइज़ करने में मदद करती है। इसे ROI की जगह भी इस्तेमाल किया जा सकता है, हालाँकि ROI से ट्रैफ़िक हासिल करते समय की अप्रत्यक्ष लागत भी निकाली जा सकती है।
Landing Page टेस्टिंग की बेस्ट प्रैक्टिस
- अपने टेस्ट को सटीक ढंग से ट्रैक करें
ऐसा ट्रैकिंग टूल चुनें जो सफलता मापने के लिए ज़रूरी सभी डेटा पॉइंट कैप्चर करे। पेड टूल अक्सर रियल-टाइम और व्यापक डेटा देते हैं, लेकिन आप Google Analytics जैसे फ़्री विकल्पों से भी शुरुआत कर सकते हैं।
- डिवाइस के आधार पर कैंपेन अलग रखें
डेस्कटॉप और मोबाइल यूज़र के लिए अलग-अलग टेस्ट बनाएँ, क्योंकि उनका व्यवहार अक्सर अलग होता है। हर प्लेटफ़ॉर्म को बेहतर समझने और उसके लिए ऑप्टिमाइज़ करने के लिए डिवाइस-विशेष कैंपेन चलाने पर विचार करें।
- कैंपेन को सही ढंग से स्ट्रक्चर करें
अगर आप एक साथ कई टेस्ट चला रहे हैं, तो साफ़-सुथरे डेटा के लिए उन्हें अलग-अलग ऐड ग्रुप में बाँट दें। इससे प्रदर्शन ट्रैक करना और ज़रूरत के हिसाब से अपने कैंपेन में बदलाव करना आसान हो जाता है।
- ट्रैफ़िक वितरण के साथ प्रयोग करें
शुरुआत में ट्रैफ़िक को वर्शन के बीच बराबर बाँटें, ताकि बेसलाइन प्रदर्शन तय हो सके। शुरुआती डेटा मिलने के बाद आप ट्रैफ़िक वेट को बेहतर प्रदर्शन करने वाले वर्शन की ओर झुका सकते हैं, और साथ ही नए आइडिया भी टेस्ट करते रह सकते हैं।
- क्वालिटी कंट्रोल बनाए रखें
लॉन्च करने से पहले अपने सभी वर्शन को अलग-अलग ब्राउज़र और डिवाइस पर जाँच लें। यह छोटा-सा कदम आपको टूटे हुए पेज या ट्रैकिंग की गड़बड़ियों पर पैसा बर्बाद होने से बचा सकता है।
- पर्याप्त रिकॉर्ड रखें
भविष्य के संदर्भ के लिए अपने टेस्ट सेटअप, नतीजे और सीख दर्ज करें। अच्छा डॉक्यूमेंटेशन आपको नाकाम टेस्ट दोहराने से बचाता है और कामयाब टेस्ट को आगे बढ़ाने में मदद करता है।
- टेस्ट करने के एलिमेंट चुनना
छोटे ब्योरों की ओर बढ़ने से पहले हेडलाइन, CTA और फ़ॉर्म जैसे ज़्यादा असर वाले एलिमेंट टेस्ट करने से शुरुआत करें। कन्वर्ज़न रेट पर सबसे ज़्यादा असर आम तौर पर इन्हीं एलिमेंट का होता है।
- सभी नतीजों की समीक्षा करें
पहले अपने प्राथमिक KPI पर ध्यान दें, लेकिन उन सेकेंडरी मेट्रिक्स को नज़रअंदाज़ न करें जो अहम जानकारी उजागर कर सकती हैं। कभी-कभी जो टेस्ट हारता हुआ दिखता है, वह आपकी ऑडियंस के बारे में कीमती जानकारी दे सकता है।
- लगातार ऑप्टिमाइज़ेशन की सोच रखें
टेस्टिंग को एक बार का प्रोजेक्ट मानने के बजाय चलती रहने वाली प्रक्रिया की तरह देखें। बाज़ार, आपकी ऑडियंस और बेस्ट प्रैक्टिस, सब समय के साथ बदलते हैं, इसलिए आपकी टेस्टिंग भी बदलनी चाहिए।
Landing Page ऑप्टिमाइज़ेशन पर अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: अगर किसी landing page का कन्वर्ज़न रेट ज़्यादा था, लेकिन क्लिक-थ्रू रेट कम, तो क्या करें?
जवाब: इसका मतलब है कि आपकी ऑडियंस सही है, लेकिन आपके landing page में सुधार की ज़रूरत है। बिना टेस्ट किए यह कहने का कोई तरीका नहीं है कि landing page के किस हिस्से को सुधारना है, लेकिन शुरुआत के लिए सबसे अच्छी जगह ख़ुद CTA है: उसका रंग, असल CTA टेक्स्ट, यहाँ तक कि उसकी जगह भी।
सवाल: अगर landing page का क्लिक-थ्रू रेट ज़्यादा है, लेकिन कन्वर्ज़न रेट कम, तो क्या करें?
जवाब: आपके landing page और ऑफ़र पेज के बीच तालमेल की कमी है। विज़िटर इसलिए चले गए क्योंकि अगला पेज वैसा नहीं था जैसी उन्होंने उम्मीद की थी। हो सकता है आपको ऑडियंस को और वार्म-अप करना पड़े। साथ ही, यह भी पक्का करें कि आपके landing page के वादे ऑफ़र पेज पर दिखने वाली चीज़ों से मेल खाते हों।



